12th Micro Economics Chapter  1 अर्थशास्त्र एवं अर्थव्यवस्था

 

 

उत्पादन के साधन :-

वे साधन जो उत्पादन में सहयोग करते है एवं उत्पादन क्रिया को सम्पूर्ण करते है उत्पादन के साधन कहलाते है I

उदाहरण : भूमि, श्रम, पुंजी, उद्दम I

 

साधन आय :-

उत्पादन के साधनों को उनकी सेवाओ के बदले जो आय प्राप्त होती है साधन आय कहलती है I

भूमि – किराया/लगान

श्रम – मजदूरी

पुंजी – ब्याज

उद्दम – लाभ

 

उत्पादन के साधनों की विशेषताए :-

(i) संसाधन सिमित है I

(ii) संसाधनो के वैकल्पिक प्रयोग है I

जैसे :- दूध से पनीर, खोया, चाय, दही इत्यादि में प्रयोग I

 

अर्थव्यवस्था :-

अर्थव्यवस्था वह नीति है जिससे लोगो को रोजगार प्राप्त होता है I

 

अर्थशास्त्र :-

अर्थशास्त्र दुर्लभ संसाधनो के इष्टतम प्रयोग का इस प्रकार अध्धयन करता है, जिससे कि व्यष्टि स्तर पर व्यक्तिगत लाभ अधिकतम हो सके तथा समष्टि स्तर पर आर्थिक लाभ अधिकतम हो सके I

 

आर्थिक समस्या क्या है ? इसके उत्पन्न होने के कारण बताइए :-

आर्थिक समस्या मूलतः चयन की समस्या है I इसके उत्पन्न होने के निम्नलिखित कारण है :-

(i) संसाधन सिमित है :-

समरे लिए उपलब्ध साधन भूमि, श्रम, पुंजी, उद्दम सिमित मात्रा में है, जिनकी वजह से आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है I

 

(ii) असीमित इच्छाए :-

मानव की इच्छाए असीमित होती है एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी स्वतः उत्पन्न हो जाती है जिससे आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है I

 

(iii) संसाधनो के वैकल्पिक प्रयोग :-

संसाधनो के वैकल्पिक उपयोग के कारण ही आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है I

 

दुर्लभता और चयन में सम्बंध :-

दुर्लभता और चयन साथ-साथ चलने वाली प्रक्रिया है और जब-जब दुर्लभता होगी तो चयन करना पड़ेगा I

दुर्लभता :-

शून्य कीमत पर जब किसी वस्तु की मांग उसकी पूर्ति से अधिक होती है तो वह दुर्लभता कहलाती है I

चयन :-

विकल्पों में से चुनाव चयन कहलाता है I यदि संसाधन सिमित होंगे तो हमे चयन करना पड़ेगा जिसको हम एक उदाहरण द्वारा समझ सकते है I

उदाहरण :- हमारे पास भूमि का एक टुकड़ा है या तो हम उस पर खेती कर ले या घर बना लें I

यह उत्पादक को इसलिए तय करना पड़ता है क्योकि भूमि हमारे पास सिमित मात्रा में है I

 

व्यष्टि अर्थशास्त्र :-

व्यष्टि अर्थशास्त्र वह अर्थशास्त्र है जिसमे व्यक्तिगत आर्थिक इकइयो का अध्धयन किया जाता है I

जैसे:- एक उपभोक्ता का व्यवहार, एक फर्म का उत्पादन I

 

समष्टि अर्थव्यवस्था :-

समष्टि अर्थशास्त्र वह अर्थशास्त्र है जिसमे सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का अध्धयन किया जाता है I

जैसे:- उत्पादन तथा रोजगार का सिध्दांत कुल मांग कुल पूर्ति I

 

व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर :-

व्याष्टि अर्थशास्त्र समष्टि अर्थशास्त्र
(i) व्याष्टि अर्थशास्त्र छोटी आर्थिक इकइयो के आर्थिक मुद्दों से सम्बन्धित है I

 

(ii) व्यष्टि अर्थशास्त्र का सम्बंध कीमत के निर्धारण से है I

 

 

(iii) व्यष्टि अर्थशास्त्र की मान्यता है कि समष्टि चर स्थिर रहते है I इसलिए हम यह मानकर चलते है कि सामान्य कीमत स्तर स्थिर है I

 

(iv) व्यष्टि अर्थशास्त्र के घटक :- उपभोक्ता व्यवहार का सिध्दांत, उत्पादक व्यवहार का सिध्धांत, कीमत सिध्धांत है I

(i) समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर के अरेथिक मुद्दों से सम्बन्धित है I

 

(ii) समष्टि अर्थशास्त्र मूल रूप से सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था में समग्र उत्पादन तथा सामान्य कीमत स्तर के निर्धारण से है I

 

(iii) समष्टि अर्थशास्त्र की ये मान्यता है कि व्यष्टि चर स्थिर है इसलिए इसमें GDP को स्थिर मानते है I

 

(iv) समष्टि अर्थशास्त्र के घटक संतुलित उत्पादन तथा रोजगार से सम्बन्धित, स्फीति तथा अवस्फीति अन्तराल, सरकारी बजट इत्यादि I

 

वास्तविक अर्थशास्त्र :-

भूतकाल, वर्तमान, भविष्य के आर्थिक मुद्दों से सम्बन्धित होता है I आर्थिक स्थितियों से सम्बन्धित तथ्यों तथा आंकड़ो द्वारा अध्धयन किया जाता है I

 

वास्तविक कथनों की विशेश्त्ये :-

(i) यह कथन आर्थिक समस्याओ की प्रक्रति तथा सीमा पर प्रकाश डालते है I

(ii) यह बहुत, वर्तमान, भविष्य से सम्बन्धित तथ्यों व आंकड़ो पर आधारित होते है I

(iii) इन कथनों की सत्यता को जांचा जा सकता है I

(iv) ये कथन अर्थशास्त्रियो के विचारो को नही दर्शाता I

 

आदर्शात्मक अर्थशास्त्र :-

आदर्शात्मक अर्थशास्त्र क्या होना चाहिए से सम्बन्धित है ये आर्थिक समस्याओ पर अर्थशास्त्रियो के विचारो से सम्बन्धित है I

आदर्शात्मक कथनों की विशेषताए :-

(i) इनमे कथन मुल्यांकन निहित है I

(ii) इन कथनों के कारण विवाद एवं बहस होती है I

(iii) ये कथन केवल विचार दर्शाते है इसलिए इनकी सत्यता को जांचा नही जा सकता I

(iv) ये कथन दर्शाते है कि किसी भी आर्थिक समस्या का उपाय क्या होना चाहिए I

 

वास्तविक अर्थशास्त्र तथा आदर्शात्मक अर्थशास्त्र में अंतर :-

वास्तविक अर्थशास्त्र आदर्शात्मक अर्थशास्त्र
(i) वास्तविक अर्थशास्त्र भूत, वर्तमान, भविष्य के आर्थिक मुद्दों से सम्बन्धित है I

 

(ii) वास्तविक अर्थशास्त्र क्या था, क्या है, क्या होगा से सम्बन्धित होगा I

 

(iii) वास्तविक कथन सदैव सत्य नही होते ये सत्य-असत्य दोनों हो सकते है I

 

(iv) वास्तविक अर्थशास्त्र में कथन मुल्यांकन निहित नही है I

(i) आदर्शात्मक अर्थशास्त्र आर्थिक समस्याओ पर अर्थ्शाश्त्रियो के विचारो से सम्बन्धित है I

 

(ii) यह क्या होना चाहिए से सम्बन्धित है I

 

 

(iii) आदर्शात्मक अर्थशास्त्र कथनों को सत्य-असत्य नही कहा जा सकता ये केवल विचार होते है I

 

(iv) आदर्शात्मक अर्थशास्त्र कथन मुल्यांकन निहित है I

 

अर्थव्यवस्था :-

यह वह नीति है जिससे लोगो को रोजगार प्राप्त होता है I

  • अर्थव्यवस्था तीन प्रकार की होती है :-

(i) बाजार अर्थव्यवस्था :- पूंजीवादी – अमेरिका

(ii) केन्द्रीय योजनावाद अर्थव्यवस्था – चीन

(iii) मिश्रित अर्थव्यवस्था – भारत

 

  • बाजार अर्थव्यवस्था :-

यह वह अर्थव्यवस्था है जिसमे उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी हाथो में होता है I क्या, कैसे, किसके लिए उत्पादन करें I यह निजी उद्दमी तय करते है I इनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है I अगर कोई समस्या आती है तो उसका अमधन बाजारी शक्तियों मांग एवं पूर्ति के द्वारा किया जाता है बाजार अर्थव्यवस्था का फायदा यह है कि इससमे स्वहित को प्रोत्साहन मिलता है तथा उपभोक्ता की प्रभुसत्ता होती है I जब कि बाजार अर्थव्यवस्था में सामाजिक कल्याण की अवहेलना होती है जिससे गरीब लोगो को नुकसान होता है I

 

  • केन्द्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था :-

इस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों का अवमित्व सरकार या केन्द्रीय अधिकारी पर होता है I क्या, कैसे, किसके लिए उत्पादन करें यह केन्द्रीय अधिकारी तय करता है I इस अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण होता है I इस अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्याओ का समाधान आर्थिक नियोजन द्वारा किया जाता है I इस अर्थव्यवस्था का फायदा यह है कि इसमें सामाजिक कल्याण पर बल दिया जाता है तथा नुकसान यह है कि आर्थिक स्वतन्त्रता कम होती है सरकार की तरफ से उनके बंधन लगाये जाते है तथा नवप्रवर्तन इस अर्थव्यवस्था में कम होते है I

 

  • मिश्रित अर्थव्यवस्था :-

यह वह अर्थव्यवस्था है जिसमे सार्वजानिक क्षेत्र तथा निजी क्षेत्र मिलकर कार्य करते है इसमें निजी क्षेत्र सरकार के अधीन व नियमो कानूनों कार्य करते है I यह अर्थव्यवस्था लाभ के साथ-साथ सामाजिक कल्याण पर भी बल देती है आर्थिक समस्याओ को नियोजन के द्वारा ठीक किया जाता है I इसमें सामाजिक कल्याण को प्रोत्साहन दिया जाता है परन्तु इसका अवगुण यह है कि इसमें भ्रष्टाचार पाया जाता है I

उदाहरण :- भारत की अर्थव्यवस्था

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