12th Micro-Economics CHAPTER 7 -उत्पादन फलं और एक साधन के प्रतिफल

 

उत्पादन फलन:- इससे अभिप्राय भोतिक आगतो (साधन) तथा भोतिक निर्गतो (उत्पादन ) के बीच पाए जाने वाले सम्बंध से है I

अल्पकाल:- यह समय की वह अवधि है जिसमे एक साधन परिवर्तनशील तथा बाकि सभी स्थिर होते हैं I

 

दीर्घकाल:- यह समय की वह अवधि है जिसमे सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं I

 

साधनों के प्रकार:-

साधन दो प्रकार के होते है :-

(i) स्थिर साधन:- यह वे साधन है जिनका प्रयोग उत्पादन में परिवर्तन होने से परिवर्तित नही होता I भूमि और मशीन स्थिर साधन है I

 

(ii) परिवर्ती साधन :- यह वे साध्यं है जो उत्पादन में परिवर्तन के अनुसार इन्हें परिवर्तित क्र सकते है I जेसे – श्रम , श्रम को आवश्यकतानुसार बढ़ाया व घटाया जा सकता है I

 

कुल उत्पादन:- परिवर्ती साधनों की सभी इकाइयो का प्रयोग करने से जो उत्पादन होता है उसे कुल उत्पादन (TP) कहते है I

                        TP = AP × Q

 

सीमांत उत्पादन (MP) :- इससे अभिप्राय कुल उत्पादन में परिवर्तन से है जब परिवर्ती साधन की एक अतिरिक्त इकाई का प्रयोग करने से कुल उत्पादन में जो परिवर्तन अत है उसे सीमांत उत्पादन कहते है I

MP = TPN – TPN-1

औसत उत्पादन (AP) :- इससे अभिप्राय परिवर्ती साधन का प्रति इकाई उत्पादन है

AP = TP

L

 

परिवर्ती अनुपात के नियम :-

यह नियम अल्पकाल में लागु होता है जिसमे एक साधन परिवर्तनशील और बाकि सभी स्थिर होते है यदि उत्पादन को बढ़ाना है तो परिवर्ती साधनों की मात्रा में व्रद्धी करेंगे जिससे पहले बढ़ते प्रतिफल, घटते प्रतिफल और अंत में ऋणात्मक प्रतिफल प्राप्त होते है I

 

 

पैमाने के प्रतिफल की अवस्थाए:-

(i) जब सीमांत उत्पद्दं बढ़ता है तो कुल उत्पत्न तेजी से बढ़ता है I

(ii) जब सीमांत उत्पादन घटता है तब कुल उत्पादन घटती डॉ से बढ़ता है I

(iii) जन सीमांत उत्पादन शून्य होता है तो कुल उत्पादन अधिकतम होता है I

(iv) जब सीमांत उत्पादन ऋणात्मक होता है जो कुल उत्पादन घटता हाई I

 

 

 

 

 

 

 

Q TP MP
1

2

3

4

5

6

7

8

 

2

5

9

12

14

15

15

14

 

2

3

4

3

2

1

0

-1

 

 

चित्र बुक से देखें

 

साधन के बढ़ते प्रतिफल के कारण

 

(i) स्थिर साधनों का पूर्ण उपयोग :-

उत्पादन की प्राम्भिक अवस्था में उत्पादन के स्थिर साधन जैसे- मशीन का कम प्रयोग होता है इसकी अतिरिक्त इकाई  का प्रयोग करने से कुल उत्पादन तथा सीमांत उत्पादन बढ़ता है I

 

(ii) श्रम विभाजन तथा कुशलता में व्रद्धी :-परिवर्ती साधन की अतिरिक्त इकाईयों का प्रयोग करने से प्रक्रिया आधारित श्र्र्म विभाजन संभव हो पता है जिसमे विभिन्न चरण में विशिष्ट श्रमिको का प्रयोग किया जाता है जिससे कुशलता में व्रद्धी होती है तथा MP बढ़ता है I

 

(iii) साधनों के उचित समन्वय :-जब तक उत्पादन के स्थिर साधनों का अल्प उपयोग होता है, परिवर्ती साधनों की अतिरिक्त इकाइयों का प्रयोग करने से स्स्थिर तथा परिवर्ती साधन की समन्वयता में व्रद्धी होती हयाई जिससे TP और MP बढ़ता है I

 

साधनों के घटते प्रतिफल

(i) साधनों की स्थिरता :-

घटते प्रतिफल के नियम के लागु होने का मुख्य कारण साधनों की स्थिरता है जैसे जैसे परिवर्ती साधन की अधिक से अधिक इकाइयों को स्थिर साधन के साथ प्रयोग में लाया जाता है तो परिवर्ती साधनों का अधिक प्रयोग करने से घटते प्रतिफल प्राप्त होते है I

 

(ii) अपूर्ण साधन सम्पन्नता :- उत्पादन के साधन एक-दुसरे के अपूर्ण प्रतिस्थापक है अधिक से अधिक श्रम अतिरिक्त पुंजी इकाई के लिए निरंतर प्रयोग नही किया जा सकता I उत्पादन को केवल परिवर्ती साधनों में व्रद्धी करके ही बढ़ाया जा सकता है तब घटते प्रतिफल प्राप्त होते है I

 

(iii) साधनों में कम समन्वयता :- स्थिर साधनों के साथ परिवर्ती साधन के निरंतर भड़ते हुए प्रयोग के कारण अंततः उनमे आदर्श साधनं अनुपात बिगड़ जाता है इसके फलस्वरूप परिवर्ती तथा स्थिर साधनों का उचित समन्वय नही हो पाता अतः सीमांत उत्पादन घटने लगता है I

 

औसत उत्पादन तथा सीमांत उत्पादन में सम्बंध

(i) जब सीमांत उत्पादन औसत उत्पादन से अधिक होता है औसत उत्पादन बढ़ता है I चित्र में एसा बिंदु A से पहले तक जब औसत उत्पादन अपने उच्चतम बिंदु पर है I

 

(ii) जब सीमांत उत्पादन औसत उत्पादन से कम होता है तब औसत उत्पादन घटता है I चित्र में एसा A बिंदु के बाद होता है जहाँ औसत उत्पादन अपनी छोटी या उपरी सिरे पर है I

 

(iii) जन सीमांत उत्पादन तथा औसत उत्पादन बराबर है तब औसत उत्पादन अधिकतम होता है यह ठीक b इंदु A पर है अतः MP वक्र AP वक्र को उसके अच्च्तं बिंदु पर काटता है I

 

(iv) सीमांत उत्पादन शून्य व ऋणात्मक हो सकता है लेकिन AP धनात्मक रहता है I

 

 

परिवर्ती अनुपात के नियम की मान्यताए:-

(i) वह अनुपात जिनमे उत्पादन के कारको को जोड़ा जाता उसे बदला जा सकता I

 

(ii) परिवर्ती साधनों की सभी इकाइयो समरूप है I या समान रूप से कुशल है I

 

(iii) उत्पादन की तकनीक में कोई परिवर्तन नही होता I

 

A.P × 2 = T.P

 

T.P  = A.P

L

 

TPn – TPn-1  = M.P

 

P × L = T.P

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Q.1

Q TP AP MP
1

2

3

4

5

6

7

8

 

2

5

9

12

14

15

15

14

2

2.5

3

3

2.8

2.5

2.14

1.75

2

3

4

3

2

1

0

-1

 

 

Q.2

Q TP AP MP
0

1

2

3

4

5

6

7

8

0

6

20

48

72

80

84

84

80

0

6

10

16

18

16

14

12

10

0

6

10

6

18

16

14

12

10

Q.3

 

Q TP AP MP
1

2

3

4

5

6

40

100

150

180

180

162

40

50

50

40

36

27

40

60

50

30

0

-18

 

 

 

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