Chapter-7 अल्पकालीन संतुलन उत्पादन

संतुलन उत्पादन की अवधारणा :- आय तथा उत्पादन संतुलन से अभिप्राय उत्पादन तथा आय के उस स्तर से है जिस पर समग्र मांग समग्र पूर्ति के होती है I

AS = AD

 

समग्र पूर्ति :- से अभिप्राय अर्थव्यवस्था में उत्पादन के इच्छित स्तर से है I

 

समग्र मांग :- समग्र मांग GDP के उस स्तर को व्यक्त करती है जो एक लेखा वर्ष के दौरान खरीददार खरीदने की इच्छा रखते है I

 

AD = C + I

AS = C + s

C+I  = C+S

S = I

प्रत्याशित बचत :- इससे अभिप्राय एक वर्ष अवधि के दौरान इच्छित बचत या नियिजित बचत से है I वी बचत जो एक वर्ष की अवधि के दौरान लोग अर्थव्यवस्था में करना चाहती है I

 

प्रत्याशित निवेश :- इससे अभिप्राय एक वर्ष की अवधि के दौरान इच्छित निवेश या नियोजित निवेश से है यह वह निवेश व्यय है जो एक वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में लोग करना चाहते हैI

 

यथार्थ बचत :- इससे अभिप्राय एक वर्ष की अवधि के दौरान अर्थव्यवस्था में वास्तविक बचत से है I

 

यथार्थ निवेश :- इससे अभिप्राय एक वर्ष की अवधि के दौरान अर्थव्यवस्था में वास्तविक निवेश से है I

 

संतुलन उत्पादन / आय (जीडीपी) के निधन के अध्ययन के लिए दो दृष्टिकोण है

  1. समग्र पूर्ति = समग्र मांग द्रष्टिकोण (AS-
  2. बचत = निवेश दृष्टिकोण (s = I)

 

समग्र पूर्ति :- समग्र मांग दृष्टिकोण (AS- इस दृष्टिकोण के अनुसार संतुलित GDPतब प्राप्त होता है जब अर्थव्यवस्था में समग्र पूर्ति = समग्र मांग हो I

 

  1. यदि समग्र पूर्ति समग्र मांग से अधिक हो (AS>AD) जब समग्र पूर्ति समग्र मांग से अधिक होती है तब अर्थव्यवस्था में वस्तुओ तथा सेवाओ के प्रवाह में उनकी मांग से अधिक होने की प्रवर्ती पाई जाती है I परिणाम स्वरूप कुछ वस्तुए बिना बीके रह जाती है I इस गैर जरूरी स्टाक को समाप्त करने के लिए उत्पादक उत्पादन में कटौती करेंगे इसके फलस्वरूप AS में गिरावट आएगी और वह समग्र मांग के बराबर हो जाएगी इस प्रकार समग्र पूर्ति AS अपने आपको समग्र मांग को समन्वित करती है I

 

  1. यदि समग्र पूर्ति समग्र मांग से कम हो (AS<AD) जब समग्र पूर्ति समग्र मांग से कम हो जाती है तब अर्थव्यवस्था में वस्तुओ तथा सेवाओ प्रवाह में उनकी मांग से कम होने की प्रवर्ती पाई जाती है उत्पादकों के वर्तमान स्टाक को बिक्री हो जाएगी इच्छित स्टाक फिर इकठ्ठा करने के लिए उत्पादक अधिक उत्पादन की योजना बनाएगेफलस्वरूप समग्र पूर्ति बढ़ेगी और समग्र मांग के बराबर जो जाएगी इस प्रकार समग्र पूर्ति समग्र मांग के साथ एकाकार हो जाती है I

 

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