Chapter-8 पूर्ण रोजगार संतुलन

पूर्ण रोजगार संतुलन (full employment equilibrium )

इससे अभिप्राय अर्थव्यवस्था की उस स्थिति से है जब संसाधनो के पूर्ण उपयोग के साथ AS = AD (अथवा s = I) होता है अतः अत्ढ़ व्यवस्था में कोई अतिरिक्त क्षमता या बेरोजगारी नही होती I

 

अल्प रोजगार संतुलन

इससे अभिप्राय अर्थव्यवस्था की उस स्थिति से है जब संसाधनो के पिरन उपयोग के बिना AS = AD तथा s=i होता है इसमें इच्छुक लोगो को रोजगार नही मिलता I

 

पूर्ण रोजगार

इससे अभिप्राय उस स्थिति से है I जिससे उन सभी लोगो को काम मिल जाता है जो काम करने योग्य है तथा काम करने के लिए तैयार है I

 

एच्छिक बेरोजगारी

एच्छिक बेरोजगारी तब होती है जब कुछ लोग ना तो काम करने के इच्छुक होते है और ना ही प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने के लिए तैयार होता है I

 

अनैच्छिक बेरोजगारी

अनैच्छिक बेरोजगारी वह बेरोजगारी होती है जब प्रचलित मजदूरी दर पर एक व्यक्ति कार्य करने के लिए तैयार होता है परन्तु उसे काम नही मिलता तो वह अनैच्छिक बेरोजगारी कहलाती है I

 

संघर्षात्मक बेरोजगारी

संघर्षात्मक बेरोजगारी वह बेरोजगारी है जो नौकरी में परिवर्तन से एक गत्यात्मक अर्थव्यवस्था में पाई जाती है I यह बेरोजगारी श्रम की गतिहीनता बिजली की कमी, कच्चे माल की कमी मशीनों की टूट-फुट तथा अच्छे रोजगार की तलाश में पाई जाती है I

 

संरचनात्मक बेरोजगारी

वह बेरोजगारी है जो कुछ उद्धोगो के दीर्घकालीन व्हास के कारण होती है तकनीक में परिवर्तन, संसाधनो में कमी के कारण I

 

अभावी (न्यून) मांग

न्यून मांग से अभिप्राय उस स्थिति से है जिससे अर्थव्यवस्था में पुर्न्रोज्गर स्तर के अनुरूप समग्र मांग AD समग्र पूर्ति से कम होती है I

 

न्यून समग्र मांग के कारण अर्थव्यवस्था में इच्छित समग्र पूर्ति के बीच संतुलन  GDP के कम स्तर पर स्थापित होता है यह स्तर पूर्ण रोजगार से कम है यह अल्परोजगार संतुलन की स्थिति है I

 

व्याख्या :- पूर्ण रोजगार उत्पादन के लिए समग्र मांग के इच्छित स्तर को ADP द्वारा प्रदर्शित किया गया है AD, U समय मांग के अल्परोजगार स्तर को प्रकट करता है AD, F तथा ADU के बीच खड़ा अंतर पूर्ण रोजगार की प्राप्ति के लिए मांग की न्यूनतम  को प्रकट करता है जो की इस न्यूनतम के कारण economy में अल्परोजगार संतुलन बिंदु पर है संतुलन उत्पादन से कम है जो OM के बराबर है I

 

अवस्फीति अन्तराल :- किसी अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार की स्थिति को बनाए रखने के लिए जितनी समग्र ,मांग की आवश्यकता होती है, यदि समग्र मांग उससे कम हो तो इन दोनों के अंतर को अवस्फीति अन्तराल कहते है एसी स्थिति में अर्थव्यवस्था में अनैच्छिक बेरोजगारी पाई जाती है अवस्फीति अन्तराल को पूर्ण रोजगार के अनुरूप इच्छित समग्र तथा अल्परोजगार के अनुरूप इच्छुक समग्र मांग के अंतर द्वारा मापा जाता है I

 

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