Chapter-11 भुगतान शेष

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भुगतान शेष :- एक देश का भुगतान शेष देश के निवासियों के बीच सभी आर्थिक सौदों का कर्म बद्ध लेखा है I   भुगतान शेष की मदे :- वस्तुओ का आयात तथा निर्यात सेवाओ का आयात तथा निर्यात पूंजी अंतरण   भुगतान शेष के खाते :- चालू खाता पूंजी खाता   चालू खाता :- वः खाता है जिसमे वस्तुओ का आयात निर्यात तथा सेवाओ का आयात निर्यात एक पक्षीय अंतरण शामिल होते है I   चालू खाते की मदे :- वस्तुओ का आयात तथा निर्यात सेवाऊ का आयात तथा निर्यात एक पक्षीय अंतरण   पूंजी खाता वह खाता है I जो एक देश के निवासियों तथा शेश्विश्व के निवासियों द्वारा किये गए उन सभी लेन- देनो का रिकार्ड करता है जिनसे परिसम्पत्ति के स्वामित्व में परिवर्तन होता है I  …
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Chapter-10 विदेशी विनिमय दर

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विदेशी विनिमय दर उस दर को कहते है जिस पर किसी देश की करेंसी की एक इकाई के बदले देश की कितनी मुद्रा इकाई मिल सकती है I S = 60 रु   विनिमय दर की प्रणाली स्थिर विनिमय दर प्रणाली निम्न विनिमय दर प्रणाली   स्थिर विनिमय दर वह दर है जो सरकार के द्वारा निर्धारित की जाती है I इसके अंतर्गत दो प्रकार काटे है :- विनिमय दर की स्वर्ण मांग प्रणाली ब्रिटेन वुड्स प्रणाली   विनिमय दर की स्वर्ण मांग प्रणाली :- यह प्रणाली 1920 से पहले प्रचलित थी जिससे विभिन्न देशो में प्रचलित विभिन्न करेंसियो के बिच समता को एक साझी इकाई स्वर्ण को माना जाता था अर्थात करेंसी का मूल्य दूसरी करेंसी में निर्धारित करने के लिए प्रत्येक करेंसी की स्वर्ण मूल्य कु तुलना की…
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Chapter-9 सरकारी बजट

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बजट एक लेखा वर्ष में सरकार की अनुमानिक आय तथा व्यय का ब्यौरा बजट कहलाता है I   लेखा वर्ष = 1 अप्रैल से 31 मार्च   सरकारी बजट के उदेश्य GDP का व्रद्धी की ऊँची दर संसाधनों का पुनः आबंटन भारत तथा सम्पत्ति का पुनः वितरण आर्थिक स्थिरता बजट रोजगार के अवसर बजट की संरचना   बजट के दो अंग है :- राजस्व बजट पूंजीगत बजट   बजट प्राप्तियां बजट प्रप्तियानो से अभिप्राय एक वित्तीय वर्ष में सरकार को सभी श्रोतो से प्राप्त होने वाली अनुमानित आय से है I   बजट प्राप्तियो को दो भागो में बाटां जा सकता है :- राजस्व प्राप्तियां पूंजीगत प्राप्तियां   PURCHASE FULL EXPLAINED PDF NOTES 10 PER CHAPTER ONLY INTERESTED STUDENT WHATSAPP US ON 9873611140 (NOT FOR CALL) E -Mail [email protected] .…
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Chapter-8 पूर्ण रोजगार संतुलन

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पूर्ण रोजगार संतुलन (full employment equilibrium ) इससे अभिप्राय अर्थव्यवस्था की उस स्थिति से है जब संसाधनो के पूर्ण उपयोग के साथ AS = AD (अथवा s = I) होता है अतः अत्ढ़ व्यवस्था में कोई अतिरिक्त क्षमता या बेरोजगारी नही होती I   अल्प रोजगार संतुलन इससे अभिप्राय अर्थव्यवस्था की उस स्थिति से है जब संसाधनो के पिरन उपयोग के बिना AS = AD तथा s=i होता है इसमें इच्छुक लोगो को रोजगार नही मिलता I   पूर्ण रोजगार इससे अभिप्राय उस स्थिति से है I जिससे उन सभी लोगो को काम मिल जाता है जो काम करने योग्य है तथा काम करने के लिए तैयार है I   एच्छिक बेरोजगारी एच्छिक बेरोजगारी तब होती है जब कुछ लोग ना तो काम करने के इच्छुक होते है और ना…
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Chapter-7 अल्पकालीन संतुलन उत्पादन

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संतुलन उत्पादन की अवधारणा :- आय तथा उत्पादन संतुलन से अभिप्राय उत्पादन तथा आय के उस स्तर से है जिस पर समग्र मांग समग्र पूर्ति के होती है I AS = AD   समग्र पूर्ति :- से अभिप्राय अर्थव्यवस्था में उत्पादन के इच्छित स्तर से है I   समग्र मांग :- समग्र मांग GDP के उस स्तर को व्यक्त करती है जो एक लेखा वर्ष के दौरान खरीददार खरीदने की इच्छा रखते है I   AD = C + I AS = C + s C+I  = C+S S = I प्रत्याशित बचत :- इससे अभिप्राय एक वर्ष अवधि के दौरान इच्छित बचत या नियिजित बचत से है I वी बचत जो एक वर्ष की अवधि के दौरान लोग अर्थव्यवस्था में करना चाहती है I   प्रत्याशित निवेश :- इससे…
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Chapter-6 समग्र मांग तथा उसके घटक

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समग्र मांग से अभिप्राय एक लेखा वर्ष के दौरान देश में उत्पादित वस्तुओ तथा सेवाओ पर किए जाने वाले व्यय के कुल जोड़ से है I   समस्त मांग के घटक निजी अंतिम उपभोग व्यय सरकारी अंतिम उपभोग व्यय निजी निवेश शुद्ध नर्यात   समग्र मांग तालिका :- वह तालिका है जो आय के विभिन्न स्तरों पर लोगो के इच्छित व्यय को प्रकट करती है आय के ऊँचे स्तर पर लोग अधिक व्यय करेंगे तथा निम्न स्तर पर कम व्यय करेंगे इस प्रकार आय और व्यय के बीच में धनात्मक सम्बंध है I   इसमें दो मुख्य बाते   आय के बहुत निम्न स्तर पर समस्त मांग आय से अधिक होती है क्योकि उपभोग हमेशा जारी रहता है I   आय के उच्च स्तर पर व्यय आय से कम होता…
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Chapter-5 बैंकिंग: वाणिज्य बैंक तथा केन्द्रीय बैंक

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वाणिज्यिक बैंक वाणिज्यिक बैंक वह वित्तीय संस्था है जो लोगो के रू को जो अपने पास जमा के रूप में स्वीकार करती है उनको उपभोग तथा निवेश के लिए ऋण देती है I   वाणिज्यिक बैंक के कार्य   जमा स्वीकार करना ऋण देना   केन्द्रीय बैंक देश का सर्वोच्च बैंक जो कि देश की सम्पूर्ण बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करता है यह नोट जारी करने की एक मात्र एजेंसी है यह सरक के बैंक का कार्य करता है तथा देश में मुद्रा की पूर्ति को नियंत्रित करता है I भारत में रिजर्व बैंक भारत का केन्द्रीय बैंक है I   केन्द्रीय बैंक के कार्य   नोट जारी करना सरकार का बैंक बैंको का बैंक अंतिम ऋण दाता विदेशी विनिमय का संरक्षक समाशोधन ग्रह का कार्य साख का नियन्त्रण  …
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Chapter-4 मुद्रा

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वस्तु विनिमय प्रणाली   इससे अभिप्राय उस प्रणाली से है जिसमे वस्तु का वस्तु से विनिमय किया जाता है अर्थात एक वस्तु प्राप्त करने के लिए दूसरी वस्तु दी जाती है I   वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयाँ :- आवश्यकता दोहरे संयोग का आभाव मूल्य मापक का आभाव स्थगित भुगतानों मनो का आभाव मूल्य की संचय ह्स्तान्तारण की समस्या   मुद्रा मुद्रा RBI द्वारा जारी की जाती है यह विनिमय का माध्यम है (मुद्रा वः है जो मुद्रा का कार्य करे)   मुद्रा के प्रकार आदेश मुद्रा न्यास मुद्रा धातु मुद्रा पूर्ण काय मुद्रा साख मुद्रा   मुद्रा के कार्य विनिमय का माध्यम मूल्य का मापक स्थगित भुगतानों का आधार मूल्य संचय व् हस्तांतरण   PURCHASE FULL EXPLAINED PDF NOTES 10 PER CHAPTER ONLY INTERESTED STUDENT WHATSAPP US ON 9873611140…
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